भुवनेश्वर: ओड़िया फिल्म उद्योग के “भीष्म पितामह” कहे जाने वाले बहुआयामी व्यक्तित्व प्रशांत नंदा आज 80 वर्ष के हो गए हैं. उनके जन्मदिन के अवसर पर ओलीवुड (ओड़िया फिल्म इंडस्ट्री) के कलाकारों, प्रशंसकों और राजनीतिक जगत की दिग्गज हस्तियों ने उन्हें बधाई दी है. प्रशांत नंदा ने न केवल अभिनय, बल्कि निर्देशन, पटकथा लेखन और राजनीति में भी अपनी अमिट छाप छोड़े हैं.

उन्होंने 1959 में फिल्म ‘दस्यु रत्नाकर’ से एक बाल कलाकार के रूप में अपने सफर की शुरुआत की थी. प्रशांत नंदा ओड़िया सिनेमा के उन गिने-चुने कलाकारों में से हैं जिन्होंने अभिनय के साथ-साथ निर्देशन, गायन, गीत लेखन और पटकथा लेखन में भी महारत हासिल की. उन्होंने प्रसिद्ध हिंदी फिल्म ‘नैया’ (1979) का निर्देशन किया और उसमें मुख्य भूमिका भी निभाई, जिसे आज भी सराहा जाता है. इसके अलावा उन्होंने ‘पहेली’ जैसी फिल्मों में भी काम किया. ‘शेष श्रावण’, ‘बलिदान’, ‘पूजा’, ‘हीरा नीला’ और ‘जगा बलिया’ जैसी सुपरहिट फिल्मों के जरिए उन्होंने ओड़िया सिनेमा को एक नई ऊंचाई दी.
सिनेमा में उनके योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है:
- राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: उनकी कई फिल्मों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली.
- जयदेव पुरस्कार: ओड़िया सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान.
- राज्य फिल्म पुरस्कार: उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और निर्देशक की श्रेणियों में कई बार राज्य पुरस्कार मिले हैं.
सिनेमा के साथ-साथ प्रशांत नंदा ने सार्वजनिक जीवन में भी बड़ी भूमिका निभाई है. वे ओडिशा सरकार में शिक्षा मंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में राज्यसभा सांसद के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
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