Separatist Asiya Andrabi Sentenced to life Imprisonment: दिल्ली की एक विशेष अदालत ने कश्मीरी अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। जबकि उसकी दो सहयोगियों सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को 30-30 साल की सजा सुनाई है। तीनों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आतंक से जुड़े एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
इस साल 14 जनवरी को अदालत ने तीनों को प्रतिबंधित संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत (DeM) से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने का दोषी ठहराया था। सजा का ऐलान 24 मार्च देर शाम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंदरजीत सिंह ने किया।
मामले में अंद्राबी (62), नसरीन (58) और फेहमीदा (48) को दोषी ठहराने के बाद अदालत ने उनके लिए सजा की अवधि पर कारण बताते हुए 28 पृष्ठ का आदेश दिया। न्यायाधीश ने कहा कि दोषियों में से किसी ने भी अपने कृत्यों के प्रति कोई पश्चाताप नहीं दिखाया है, बल्कि यह कहा गया है कि उन्हें अपने किए पर गर्व है और वे आगे भी वही काम करते रहेंगे। उन्होंने इस मामले की तुलना 26/11 मुंबई हमलों के दोषी और गिरफ्तार किए गए अकेले आतंकवादी अजमल कसाब के मामले से की, जिसने अपने कृत्य के लिए कोई पश्चाताप व्यक्त नहीं किया था।

अदालत ने यह तर्क भी दिया कि दोषी के प्रति किसी भी प्रकार की सहनशीलता दिखाने से समान विचारों वाले अन्य लोगों को यह संदेश जा सकता है कि वे कुछ वर्षों के कारावास के माध्यम से ऐसे कृत्यों से बच सकते हैं और इससे भारत के एक हिस्से में अलगाव संबंधी विचारों को बढ़ावा मिल सकता है। न्यायाधीश ने कहा कि यदि ऐसे कट्टरपंथी विचारों वाले दोषियों के प्रति नरमी दिखाई गई, तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा और भारत की अखंडता को चुनौती देने वाले अन्य तत्वों के हौसले बुलंद होंगे।
क्या है दुख्तरान-ए-मिल्लत संगठन
यह संगठन जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की मांग करता रहा है और इसकी स्थापना आसिया अंद्राबी ने ही की थी। अदालत ने आसिया को यूएपीए की कई धाराओं के तहत दोषी पाया, जिनमें धारा 18 (साजिश) और धारा 38 (आतंकी संगठन की सदस्यता) शामिल हैं। इसके अलावा उन्हें भारतीय दंड संहिता (IPC) की उन धाराओं में भी दोषी ठहराया गया, जो आपराधिक साजिश और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने से संबंधित हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अदालत से अंद्राबी के लिए उम्रकैद की सजा की मांग की थी। एजेंसी का कहना था कि उन्होंने भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ा और ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए कड़ा संदेश देना जरूरी है।

कौन हैं आसिया अंद्राबी?
आसिया ने दुख्तरान-ए-मिल्लत की शुरुआत एक रूढ़िवादी इस्लामिक संगठन के रूप में की थी, लेकिन इसके पीछे वह अलगाववादी गतिविधियों में संलिप्त थीं। केंद्र सरकार ने 2018 में इसे आतंकवादी संगठन घोषित कर प्रतिबंध लगा दिया था। 1963 में जन्मी अंद्राबी ने श्रीनगर के एक कॉलेज से होम साइंस में स्नातक किया। आगे की पढ़ाई के लिए दार्जिलिंग जाने की योजना थी। हालांकि उन्हें अनुमति नहीं मिली। बाद में उन्होंने इस्लामिक साहित्य की ओर रुख किया और जमात-ए-इस्लामी के महिला विंग से जुड़ीं, जिस पर 2019 में प्रतिबंध लगा दिया गया।
आसिया ने 1985 में जमात-ए-इस्लामी से अलग होकर दुख्तरान-ए-मिल्लत की स्थापना की। 1991 में इस संगठन ने कश्मीर में पर्दा प्रथा लागू करने के अभियान को लेकर सुर्खियां बटोरीं. 1990 में उन्होंने अलगाववादी नेता आशिक हुसैन फक्तू से शादी की, जो फिलहाल 1992 में कश्मीरी पंडित नेता एच.एन. वांचू की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। आसिया अंद्राबी दो बच्चों की मां हैं और 1993 में पहली बार गिरफ्तार हुई थीं। इसके बाद उन्हें कई बार हिरासत में लिया गया।
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