ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है. नौसैनिक गतिविधियों, नाकाबंदी और परमाणु मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच तीखी बयानबाजी जारी है. जहां अमेरिका ने ईरान की नौसेना को ‘समुद्री डाकुओं जैसा’ बताया है, वहीं ईरान ने अमेरिकी नाकाबंदी को सीधे तौर पर युद्ध का कृत्य करार दिया है. व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मिडिल ईस्ट में ईरान की नेवी अब सबसे खतरनाक बन चुकी है.

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जहां दोनों देश एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं.

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मिडिल ईस्ट में ईरान की नेवी अब सबसे खतरनाक बन चुकी है और वह “समुद्री डाकुओं के झुंड” की तरह काम कर रही है. उन्होंने कहा कि ईरान का स्ट्रेट (होर्मुज जलडमरूमध्य) पर कोई नियंत्रण नहीं है और जो गतिविधियां हो रही हैं, वह साफ तौर पर पायरेसी है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका द्वारा लगाया गया नेवी ब्लॉकेड बेहद प्रभावी साबित हो रहा है.

कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी रेडलाइन पूरी तरह स्पष्ट कर दी है. ईरान कभी भी अमेरिका और उसके सहयोगियों को धमकाने के लिए परमाणु बम हासिल नहीं कर सकता. उन्होंने कहा कि ईरान को अपने पास मौजूद एनरिच्ड यूरेनियम सौंपना होगा और अमेरिका फिलहाल ईरान के जवाब का इंतजार कर रहा है.

इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने कहा कि ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी “युद्ध का कृत्य” है और यह सीधे तौर पर युद्धविराम का उल्लंघन है.

तसनीम समाचार एजेंसी के मुताबिक, ईरान के ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ ने दो जहाज ‘MSC Francesca’ और ‘Epaminondas’ को रोक लिया और उन्हें ईरानी क्षेत्रीय जल में ले जाकर उनके माल, दस्तावेजों और संबंधित अभिलेखों की जांच शुरू की. रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के बयान के अनुसार, ये जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से निकलने की कोशिश कर रहे थे, तभी उन्हें रोका गया.

ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि ईरान की सरकार के भीतर गंभीर मतभेद हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाने की घोषणा की है. गौरतलब है कि ईरान के साथ यह संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुआ था, जिसके बाद से क्षेत्र में लगातार तनाव बना हुआ है.

पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अनुरोध पर अमेरिका ने ईरान पर हमला रोकने का फैसला किया है, ताकि ईरान एक संयुक्त प्रस्ताव पेश कर सके. हालांकि, ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि अमेरिका तभी हमले से पीछे हटेगा, जब ईरान का नेतृत्व बातचीत के लिए एकजुट प्रस्ताव सामने रखेगा.

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