Internet Cables In Strait of Hormuz: पश्चिम एशिया में छिड़ा युद्ध अब पानी युद्ध में तब्दील हो सकता है। अमेरिका से जंग बढ़ने पर ईरान पूरी दुनिया के डिजिटल ढांचे को ध्वस्त कर सकती है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बिछी इंटरनेट केबल्स यानी ‘अंडरसी फाइबर ऑप्टिक केबल्स’ (Undersea Fiber Optic Cables) को काटने की धमकी दी। अगर ईरान होर्मुज में बिछीं इंटरनेट केबल्स को काट देता है तो भारत समेत दुनियाभर में इंटरनेट ठप हो जाएगा। ईरान की धमकी के बाद होर्मुज के संकरे समुद्री रास्ते से गुजरने वाली फाइबर ऑप्टिक केबल्स पर मंडरा रहे खतरे ने भारत सहित वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है।

दरअसल होर्मुज रूट से न केवल दुनिया का 20% कच्चा तेल और 25% LNG गुजरती है, बल्कि इस रास्ते के नीचे इंटरनेट केबल्स भी बिछीं हैं। इसी संकरे रास्ते के नीचे से ‘अंडरसी फाइबर ऑप्टिक केबल्स’ का एक विशाल जाल गुजरता है, जो एशिया को यूरोप और अमेरिका से जोड़ता है। अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो भारत समेत पूरी दुनिया में इंटरनेट की स्पीड स्लो हो सकती है।

ईरान कब और कहां से काट सकता है इंटरनेट केबल्स?

ईरान की रणनीती बहुत सीधी है. ग्लोबल इंटरनेट का एक बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट के पानी के नीचे से गुज़रता है। ईरान इसे दो प्रमुख चोकप्वाइंट्स से निशाना बना सकता है, जो रेड शी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है। रेड शी में  17 सबमरीन केबल्स मौजूद हैं जो यूरोप, एशिया और अफ्रीका को जोड़ती हैं. 2024 में रेड सी में कटी केबल्स को शांति के समय में भी रिपेयर होने में 6 महीने लगे थे। युद्ध क्षेत्र (war zone) में स्पेशल रिपेयर शिप्स (Repair Ships) जा ही नहीं सकतीं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 4 प्रमुख केबल्स हैं. AAE-1, FALCON, Gulf Bridge International और Tata-TGN Gulf. पानी के नीचे naval mines , शिप एंकर या अंडरवाटर सबोटाज के ज़रिए ईरान इन्हें आसानी से नष्ट कर सकता है। अगर ये केबल्स कटती हैं तो ईरान को कोई नुकसान नहीं होगा क्योंकि उनका NIN चालू रहेगा. लेकिन अमेरिका, यूरोप और भारत को अरबों डॉलर का नुकसान होगा।

समुद्र के नीचे से गुजरता है 97% ग्लोबल डेटा

अक्सर लोगों को लगता है कि इंटरनेट सैटेलाइट के जरिए चलता है, लेकिन हकीकत अलग है। दुनिया का करीब 95 से 97% डेटा फाइबर ऑप्टिक केबल्स के जरिए ट्रांसफर होता है। ये केबल्स समुद्र के नीचे बिछी होती हैं। भारत को यूरोप, अफ्रीका और पश्चिम एशिया से जोड़ने वाली मुख्य केबल्स इसी रूट के पास से गुजरती हैं। इसमें SEA-ME-WE, AAE-1 और EIG जैसे बड़े केबल सिस्टम शामिल हैं।

भारत के लिए क्यों बड़ा है खतरा?

भारत के लिए यह खतरा और भी बड़ा है क्योंकि भारत का अधिकांश इंटरनेट ट्रैफिक इन्हीं समुद्री केबल्स के जरिए आता है। यदि होर्मुज में केबल्स कटती हैं, तो भारत के बैंकिंग सिस्टम, स्टॉक मार्केट, ई-कॉमर्स और आईटी (IT) सेक्टर को भारी नुकसान हो सकता है। डिजिटल इंडिया के इस दौर में इंटरनेट का बंद होना न केवल आम जनजीवन को प्रभावित करेगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी अरबों डॉलर का चूना लगा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग और ऑनलाइन पेमेंट गेटवे पूरी तरह बाधित हो सकते हैं, जिससे अफरा-तफरी की स्थिति पैदा होने की आशंका है।

  • लेटेंसी बढ़ जाएगी: अगर केबल्स को नुकसान होता है, तो ट्रैफिक को लंबे ‘पैसिफिक रूट’ पर डायवर्ट करना पड़ेगा। इससे लेटेंसी यानी डेटा ट्रैवल टाइम बढ़ जाएगा।
  • इंटरनेट स्लो होगा: यूट्यूब, इंस्टाग्राम और नेटफ्लिक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बफरिंग बढ़ जाएगी। वीडियो कॉल और क्लाउड सर्विस में भी दिक्कतें आ सकती हैं।

23.48 लाख करोड़ के IT सेक्टर पर असर

भारत का IT और आउटसोर्सिंग सेक्टर करीब 250 बिलियन डॉलर (23.48 लाख करोड़) का है। अमेरिकी और यूरोपीय क्लाइंट्स के साथ रियल-टाइम कनेक्टिविटी इसी लो-लेटेंसी नेटवर्क पर टिकी है। केबल कटने की स्थिति में कंपनियों को भारी नुकसान हो सकता है, जिससे सर्विस एग्रीमेंट्स (SLA) टूटने और पेनाल्टी लगने का डर है। इसके अलावा, खाड़ी देशों से आने वाली रेमिटेंस (पैसा भेजना) और SWIFT जैसे बैंकिंग ट्रांजेक्शन भी धीमे पड़ सकते हैं।

नए ऑप्शन पर निवेश कर रहा भारत

इस खतरे को देखते हुए भारत समेत कई देश अब वैकल्पिक रास्तों पर निवेश कर रहे हैं। इलॉन मस्क की स्टारलिंक जैसी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विसेज बैकअप के तौर पर देखी जा रही हैं। भविष्य में ऐसी केबल्स बिछाने की योजना है जो संवेदनशील क्षेत्रों को बायपास कर सकें। फिलहाल, होर्मुज में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव तेल की कीमतों से ज्यादा डिजिटल दुनिया की चिंता बढ़ा रहा है।

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