कुंदन कुमार/पटना। महिला आरक्षण बिल को लेकर देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के मुख्य प्रवक्ता एजाज अहमद ने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे आगामी विधानसभा चुनावों से प्रेरित एक ‘चुनावी स्टंट’ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजद इस बिल के वर्तमान स्वरूप का तब तक विरोध करती रहेगी, जब तक इसमें वंचित वर्गों की महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित नहीं की जाती।

​पिछड़ों और दलितों के हक की मांग

​एजाज अहमद ने कहा कि भाजपा संसद में परिसीमन और महिला बिल पर चर्चा सिर्फ इसलिए कर रही है ताकि दो राज्यों में होने वाले चुनावों में इसका राजनीतिक लाभ लिया जा सके। उन्होंने मांग की कि महिला आरक्षण के भीतर ‘कोटा के अंदर कोटा’ की व्यवस्था होनी चाहिए। राजद का तर्क है कि जब तक दलित, शोषित, पिछड़े और अति-पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण का प्रावधान नहीं होगा, तब तक इस बिल का वास्तविक लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी महिला तक नहीं पहुंचेगा।

​1994 की ऐतिहासिक घटना का जिक्र

​बयान के दौरान राजद प्रवक्ता ने पुराने घटनाक्रमों की याद दिलाते हुए कहा कि उनकी पार्टी इस स्टैंड पर दशकों से अडिग है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1994 में राजद सांसद सुरेंद्र यादव ने इसी मांग को लेकर सदन के भीतर बिल की कॉपी फाड़ी थी। यह विरोध किसी नीति के खिलाफ नहीं, बल्कि पिछड़ों के हक की अनदेखी के खिलाफ था।

​चुनावी फायदे की राजनीति का विरोध

​राजद ने साफ कर दिया है कि वह केवल ‘जैसे-तैसे’ बिल पास करने या चर्चा करने के पक्ष में नहीं है। एजाज अहमद ने जोर देकर कहा कि भाजपा महिलाओं के प्रति गंभीर होने के बजाय केवल हेडलाइन बटोरने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने संकल्प दोहराया कि वे संसद से सड़क तक इस मुद्दे पर अपना कड़ा रुख बरकरार रखेंगे और बिना सामाजिक न्याय के महिला आरक्षण को स्वीकार नहीं करेंगे।