Rajasthan News : अलवर। एसीबी ने गोविंदगढ़ तहसीलदार बसंत परसोया व उसके दलाल रवि उर्फ रिंकू कलाल को एक व्यक्ति से जमीन नामांतरण के एवज में 1.50 लाख रुपए की रिश्वत लेते ट्रेप किया है. एसीबी के डीएसपी शब्बीर खान ने बताया कि पीड़ित ने शिकायत की थी कि वसीयत के आधार पर उसकी मौसी (ताईजी) के हिस्से की जमीन का नामांतरण परिवादी के नाम चढ़वाने के लिए तहसील गोविंदगढ़ में फाइल लगाई तो उन्होंने उसको पटवारी व ग्राम पंचायत चिड़वाई सरपंच को भेजी.

पटवारी व सरपंच ने वसीयत रजिस्टर्ड नहीं होने के कारण जमीन बबली के नाम करने का ही इंद्राज किया. जिसकी परिवादी ने उपखंड अधिकारी गोविंदगढ़ के न्यायालय में अपील की. उपखंड अधिकारी ने परिवादी के हक में जमीन का हिस्सा चढ़ाने के आदेश 3 दिसंबर 2025 को तहसीलदार के नाम से जारी कर दिए. परिवादी ने तहसीलदार को पुनः कागजात पेश किए. इसी बीच परिवादी के हक में जमीन का हिस्सा चढ़ाने की एवज में तहसीलदार के दलाल रवि उर्फ रिंकू पुत्र सोहन लाल कलाल निवासी मोहल्ला मुंशी बाग अलवर परिवादी से 5 लाख रुपए की रिश्वत मांग ली.

एसीबी द्वारा 13 मार्च को शिकायत का सत्यापन कराने के बाद तय अनुसार 17 मार्च को रिश्वत की पहली किश्त देने के लिए एसीबी ने केमिकल पाउडर लगे 1.50 लाख रुपए परिवादी को देकर रवाना कर दिया. परिवादी ने गांव सिरमोर स्थित गुलाटी फार्म हाउस पर दलाल रवि उर्फ रिंकू को 1.50 लाख रुपए की रिश्वत दे दी. तभी एसीबी ने दलाल रवि उर्फ रिंकू को रिश्वत राशि के साथ रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया.

तहसीलदार व दलाल को बैठाकर की पूछताछ

एसीबी ने दलाल को हिरासत में लेकर तहसीलदार व दलाल को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की. तहसीलदार ने दलाल को पहचानने से इनकार कर दिया. दलाल ने उसी के कहने पर रिश्वत लेने की बात कही. एसीबी के डीएसपी शब्बीर खान ने मीडिया को बताया कि दलाल व परिवादी के बीच रिश्वत के बारे हुई वार्ता की रिकॉर्डिंग के आधार पर तहसीलदार को गिरफ्तार कर लिया.

आरोपियों से पूछताछ जारी है. तहसीलदार बसंत परसोया करीब 4 माह से ही गोविंदगढ़ तहसील में कार्यरत है. मूलरूप से सीकर जिले का रहने वाला है. फिलहाल उसका परिवार जयपुर स्थित मकान में रहता है. जबकि दलाल रवि उर्फ रिंकू कलाल गांव सिरमोर स्थित गौरव गुलाटी फार्म हाउस पर केयर टेकर है.

तहसील कर्मचारियों में मची अफरा-तफरी

ट्रेप की कार्रवाई से पहले ही एसीबी के कर्मचारी तहसील कार्यालय में आकर तैनात हो गए. स्थानीय थाना पुलिस का बल भी तहसील में तैनात करवाया दिया. तहसील कार्यालय में एसआईआर का काम चलने से काफी कर्मचारी मौजूद थे, लेकिन एसीबी ने तहसीलदार को ट्रेप की कार्रवाई की किसी को भनक तक नहीं लगने दी. कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई.